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भोजन के बाद पानी क्यों न पीयें? Why drinking water after meals is bad for health?

भोजन के बाद पानी क्यों न पीयें? Why drinking water after meals is bad for health?

आयुर्वेद औषधियों का शास्त्र बाद में हैपहले वह स्वस्थ जीवनकला को सिखाने का शास्त्र हैआयुर्वेद के अनुसार बीमारी के इलाज में ऊर्जा व्यय करने से कहीं अधिक समझदारी उन बीमारियों से बचने में हैइसके लिए हमें पहचानना होगा कि बीमारियों की फसल पैदा करने वाली भूमि कौन सी है|  क्या आपको पता है, हमारे शरीर में 90% बीमारियाँ पेट से पैदा होती हैं! कुल मिलाकर 148 तरह की विभिन्न बीमारियाँ हैं जो पेट के असंतुलन से होती हैं| छाती से नीचे और कमर से ऊपर के भाग को पेट कहते हैं जिसमें अमाशय, आंत, यकृत (लीवर), गुर्दा आदि अंग होते हैं| इन्हीं अंगों में एक अंग होता है जिसे अमाशय या जठर कहते हैं| कई लोग इसे पेट कहते हैं लेकिन पेट की परिभाषा ऊपर बताई जा चुकी है| यह वो स्थान होता है जहाँ हमारे मुँह द्वारा चबाया हुआ ग्रास सबसे पहले गिरता है| यह हमारे पेट के बाएं हिस्से में ऊपर की तरफ होता है| जैसे ही इसमें खाना गिरता है तो इसमें एक क्रिया शुरू होती है जो खाने को पचाने का काम करती है| आधुनिक विज्ञान के अनुसार कहें तो कुछ enzymes अपना काम करना शुरू कर देते हैं| इस क्रिया को शुरू करने के लिए ऊर्जा चाहिए होती है जो पेट को शरीर की गर्मी से मिलती है| इस गर्मी या अग्नि को संस्कृत में जठराग्नि कहते हैं| जैसे ही आप खाना खाने के बाद पानी पीते हैं, यह अग्नि ठंडी पड़ जाती है और खाना पेट में ही सड़ने लगता है क्योंकि अभी तक वो पूरा पचा ही नहीं था कि आपने पेट के चूल्हे को पानी से बुझा दिया! अब यह सड़न 103 तरह के रोगों को जन्म देती है| इस खाने से जो गैस बनती है वो आपके पूरे शरीर में घूमती है और आपके दिमाग के साथ सबसे ज्यादा छेड़-छाड़ करती है| वाग्भट्ट जी ने कई सूत्र लिखे हैं जिनमें 103 तरह के विभिन्न रोगों के विवरण हैं जो उत्तरोत्तर आपकी लापरवाही के साथ आगामी क्रम में बढ़ते जाते हैं – gas, अम्ल (acidity), अल्सर, बवासीर, भगंदर........और सबसे अंत में कर्क रोग यानी कैंसर!

 

वाग्भट्ट जी के अनुसार भोजन से 40 मिनट पहले तक आप जल पी सकते हैं, उसके बाद नहीं| वैसे भोजन के बीच में भी जल निषेध है परंतु केवल एक ही स्थिति में खाने के साथ जल पीया जा सकता है| यदि आप दो अलग-अलग अन्न खा रहे हैं तो पहले एक तरह का अन्न खत्म कर लें फिर उसके बाद 1-3 छोटे घूँट जल पीएं| इसके बाद आप दूसरा अन्न ले सकते हैं| उदाहरणार्थ, यदि आप चावल और रोटी खा रहे हैं तो दोनों को किसी भी क्रम में खाइए लेकिन पहले एक तरह के अन्न को खत्म कर लें और उसके बाद 1-3 घूँट ही जल पीएं; तत्पश्चात आप दूसरा अन्न खा लें| वाग्भट्ट जी ने भोजन के अंत में पीने वाले पदार्थ भी बताये हैं| भोजन के बाद फलों का रस, तक्र (छाछ या मट्ठा) या दूध पीया जा सकता है किन्तु इनमें से कोई भी दो या तीनों एक साथ नहीं पीनी चाहिए| तक्र या मट्ठा सभी जानते हैं, जो दही को मथ कर उसकी मलाई को निकाल कर बनाया जाता है| इन पेय पदार्थों को पीने के भी कुछ नियम हैं|

 

·       फलों का रस आप सुबह के नाश्ते के उपरांत ही लें| फल बेमौसम नहीं होने चाहिए| कोल्ड स्टोरेज के फल या polypack वाला जूस नहीं होना चाहिए| ताज़ा फलों का रस ही लाभकारी होता है| इसे आप दोपहर और रात्रि के भोजन के बाद न लें वरना हानि होगी| ऐसा इसीलिए है कि हमारे शरीर की तासीर समय और ऋतुओं के अनुसार बदलती रहती है| सुबह का समय वात का, दोपहर वाला पित्त का और शाम के बाद कफ़ के बढ़ने का समय होता है| फलों के रस को पचाने वाले enzyme सुबह ही सबसे सक्रिय होते हैं इसीलिए समय और शरीर की प्रकृति के अनुसार ही ये नियम बने हैं ताकि कहीं अनजाने में लाभ की अपेक्षा हमारी हानि न हो|



·       तक्र हमेशा दोपहर के भोजन के बाद ही लें| इसमें सेंध नमक, भुना हुआ जीरा या अजवाइन तथा थोड़ी से भुनी हुई हींग अवश्य डालें| यह आपकी पाचन शक्ति को बहुत बढ़ा देता है|



·       दूध हमेशा रात को सोने से पहले पीने का नियम बनाएँ| दूध में सर्वाधिक calcium होता है जो और सभी पोषक तत्वों को पचाने में हमारे शरीर की सहायता करता है| दूध को पचाने वाले enzyme सांझ होने के बाद सक्रिय होते हैं| इसमें चीनी, गुड़ आदि कुछ भी फ्लेवर न मिलाएं| इसे सादे रूप में पीना ही सर्वोत्तम है!