Cow Science

DO NOT read this article if you WANT TO REMAIN ILL in winters!! (In Hindi and English)

If you leave this video unseen, no one can save you from diseases!

DO NOT read this article if you WANT TO REMAIN ILL in winters!! (In Hindi and English)

पिछले लेख में हमने चर्चा की थी कि कैसे पंचांग की जानकारी से हम उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं और कैसे पंचांग इंग्लिश कैलेंडर से बेहतर और सटीक है| यदि आप पिछली विडियो देखना चाहें तो नीचे दिए गए link को क्लिक करें| इस विडियो में हम पंचांग के पौष मास की चर्चा करने जा रहे हैं जो कि वर्तमान में चल रहा है और मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी की अवधि का होता है| इस विडियो में जानेंगे कि ‘पौष’ मास में खान पान और दिनचर्या कैसी होनी चाहिए ताकि वात, पित्त, कफ दोष समअवस्था या balanced रहें और हम स्वस्थ रहें|

मित्रों, भारतीय पंचांग में हर महीना कृष्ण पक्ष की पहली तिथि से, जिसे प्रथमा या प्रतिपदा तिथि भी बोलते हैं, से शुरू होता है| मित्रों, भारतीय पंचांग में हर महीना कृष्ण पक्ष की पहली तिथि से, जिसे प्रथमा या प्रतिपदा तिथि भी बोलते हैं, से शुरू होता है| पौष मास भी अपने महीने के कृष्ण पक्ष की पहली तिथि से आरम्भ होकर शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि अर्थात पूर्णिमा पर अंत होता है| पौष मास भी अपने महीने के कृष्ण पक्ष की पहली तिथि से आरम्भ होकर शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि अर्थात पूर्णिमा पर अंत होता है| कृष्ण पक्ष की पहली तारिख से पिछला दिन पिछले महीने की पूर्णिमा तिथि होती है| यानी इस दिन चन्द्रमा पूरा होता है| इसके अगले दिन से यानी अगले महीने की पहली तिथि (इस case में पौष मास की पहली तिथि जब से पौष मास शुरू होता है) से चंद्रमा घटना शुरू होता है| चन्द्रमा अगले चौदह दिनों तक घटता हुआ महीने की 15वीं तिथि यानी अमावस्या को प्राप्त होता है| चन्द्रमा के घटने के इन 15 दिनों को कृष्ण पक्ष कहते हैं|

इसी के अगले दिन यानी 16वीं तिथि से बढ़ना आरम्भ होता है जो महीने की 30वीं तिथि पर पहुंचकर पूर्णिमा को प्राप्त होता है| यही महीने का अंत होता है| चन्द्रमा के बढ़ने के इन 15 दिनों को शुक्ल पक्ष कहते हैं| पौष के महीने में ठंड तेज होती है और सर्द हवाएं चलती हैं| वायु की प्रकृति ठंडी, सूखी और गतिशील होती है, अतः इस महीने में कफ (जिसकी प्रकृति भी शीत होती है) और वात (जो शरीर में वायु से बनता है) प्राकृतिक रूप से बढ़ जाते हैं जिनको यदि संतुलित न किया जाए तो खांसी, ठण्ड पकड़ना, घुटनों में दर्द, जुकाम आदि रोग हो जाते हैं| इसीलिए भारतीय परंपरा में बहुत ही ध्यान पूर्वक खान-पान और दिनचर्या पर ऋतु और मास के अनुसार बल दिया जाता है| अब भारतीय परंपरा के ये निर्देश कौन से हैं जो पौष मास के लिए दिए गए हैं? तो आइये, देखते हैं कि पौष में कौन से पदार्थ खाने चाहिए और कौन से नहीं चाहिए?

 

अन्न

अवश्य खाने योग्य अन्न – बाजरा

खाने योग्य – चावल

कम खाने योग्य – गेहूँ

‘न’ खाने योग्य – जौ, ज्वार

 

दाल

अवश्य खायें – उड़द

खायें – कुल्थी

कम खायें – तुअर या अरहर

न खायें – मोठ, मसूर, चना

 

सब्जी

अवश्य खायें – गाजर, मूली, कच्ची हल्दी

खायें – टमाटर, मूली के पत्ते, गोभी, बैंगन, काचरा, सरसों का साग, शकरकंद, चुकंदर, सहजन की फली, पालक, मटर

कम खायें – लौकी, आलू, करेला

न खायें – ककड़ी, नेनुआ, अरबी, ग्वारफली

 

फल

अवश्य खायें – सूखा नारियल

खायें – पपीता, संतरा, आंवला, अंगूर, बेर, अनार, अमरूद

न खायें – तरबूज, खरबूजा

 

मसाले

अवश्य खायें – काली मिर्च, हींग, मेथी, अजवायन, अदरक, सोंठ

खायें – हरी मिर्च, लाल मिर्च, हल्दी, हरा धनिया, राई, पुदीना, सोआ, लौंग, पतली दारचीनी, जायफल, जावित्री, केसर, पीपरामूल

कम खायें – जीरा, सज्जीखार, इलायची, सौंफ

न खायें – इमली, मीठा नीम

 

रस

अवश्य खायें – मीठा

खायें – खट्टा, नमकीन

कम खायें – तीखा

न खायें – कड़वा, कसैला

 

चिकने पदार्थों में

अवश्य खायें – तिल, सरसों, अलसी, मूंगफली, नारियल, देशी गाय का घी, मक्खन

कम खायें – नारियल (मैदानी इलाकों में रहने वाले), मूंगफली का तेल

न खायें – रिफाइंड तेल, वनस्पति घी, डेरी का घी, नारियल का तेल, butter

गव्य

अवश्य खायें – मसाला दूध, दही, लस्सी, गोमूत्र

खायें – छेना, मावा, श्रीखंड

कम खायें – छाछ, पनीर

न खायें – Cheese

 

औषधि

अवश्य खायें – गोमूत्र की औषधियां या पंचगव्य

खायें – पंचगव्य घृत

कम खायें – लहसुन

न खायें – प्याज़, एरंड का तेल

 

जल

अवश्य पीयें – ताम्बे में रखा जल, स्वर्ण जल (सोने को तपाकर तुरंत पानी से बुझाया हुआ जल), गर्म जल

पीयें – पीतल के पात्र में रखा जल

बिलकुल न पीयें – मिट्टी के घड़े का जल

 

अन्य

अवश्य खायें – गुड़, गोंद

खायें – खांड, शहद, सेंधा नमक, काला नमक, खमीर वाली चीज़ें जैसे डोसा, इडली आदि, बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, चिरौंजी, अंजीर, खजूर

कम खायें – गन्ना, नीम्बू, किशमिश, मुनक्का

न खायें – Iodized नमक, सफ़ेद शक्कर, फ्रिज का ठंडा पानी, मिश्री

 

अब कुछ विशेष बातें

1.     प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा पीठ पर धूप लें|

2.     महाशिवरात्रि तक खूब मालिश और व्यायाम करें|

 

 

जोड़ों का दर्द

यह सर्दियों में सबसे अधिक कष्ट देने वाली बीमारी है|

जिस जोड़ में दर्द होता है, वह हलचल करने में अक्षम हो जाता है|

धीरे धीरे जोड़ में सूजन आने लगती है और हड्डियाँ विकृत होने लगती हैं|

 

उपाय

1.     कम से कम आधा घंटा पीठ पर धूप लें| हलके वस्त्र के साथ लें| स्वेटर न पहनें|

2.     देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से बने तेल की मालिश पूरे शरीर पर करें|

3.     मालिश शरीर में नीचे से ऊपर यानी पैरों से आरम्भ करके ऊपर ले जानी चाहिए|

4.     मालिश पेट और जोड़ों पर गोल-गोल करनी चाहिए|

5.     दूध में एक चम्मच हल्दी और 2 चम्मच देशी गाय का घी डालकर गर्म करें और अच्छी तरह फेंटें| इस विधि से दूध तैयार करके सुबह शाम खड़े होकर पीयें|

6.     पानी सदैव बैठकर ही पीयें| खड़े होकर पानी पीने से घुटने खराब होते हैं जो अधिकतर 70 की आयु के बाद दिखाई देता है लेकिन आज के दौर में यह पहले भी दिखाई दे जाता है|

7.     अधिक से अधिक देशी गाय के घी का प्रयोग करें|

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