Cow Science

कोविड महामारी के लिए वैकल्पिक आयुर्वेदिक उपचार

2021 में COVID पुनः लौट कर आया है| 2020 में जहां इसने अधिकांश रूप से वृद्ध तथा किशोरावस्था तक के लोगों को प्रभावित किया, वहीं अपनी दूसरी लहर अर्थात 2021 में यह युवाओं को अधिक प्रभावित कर रहा है| यह एक ऐसा वायरल संक्रमण है जो आमतौर पर जानलेवा नहीं है तथा आपका शरीर इससे लड़ने में सक्षम भी है| परंतु, श्वसन तंत्र या फेफड़ों तक इसकी पहुँच के कारण इस रोग में की गई लापरवाही जानलेवा हो सकती है| 

भारत देश युवाओं से भरा हुआ देश है| इस पीढ़ी के ऊपर पारिवारिक सुरक्षा का दायित्व होता है फिर वह सुरक्षा आर्थिक हो, सामाजिक हो या शारीरिक| देश के सुरक्षित भविष्य के लिए इस पीढ़ी का सुरक्षित रहना परमावश्यक है| 

अतः चेष्टा यह होनी चाहिए कि आप शुरू से ही सतर्क होकर स्वयं को इस रोग की पहुँच से बचाएं| बचाव के ये उपाय वही हैं जिनको लेकर सरकार भी आपको सावधान करती आ रही है जैसे भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर अनावश्यक जाने से बचना, आपस में दूरी बनाए रखना, मास्क पहनना, आदि| फिर भी यदि आप संक्रमित हो ही गए हों तो बिल्कुल भी न घबराएं! कुछ सावधानियों के साथ उपचार करने पर आप पूर्ण स्वस्थ हो सकते हैं|


इस लेख में हम कुछ अनुभूत औषधियों के विषय में आपको जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं जिनका उपयोग कुछ लोगों द्वारा किया गया है बीते कुछ दिनों में तथा जिन्हें संक्रमण से युद्ध में बहुत सहायता मिली है| लगभग सात दिनों के बाद अधिकांश लोगों में शायद ही  कोई लक्षण मिला है तथा किसी भी प्रकार की क्षति (side effects) से कोई साक्षात्कार नहीं हुआ है| इनमें अधिकांश वे लोग थे जिन्होंने ऐलोपैथ का बिल्कुल भी सेवन नहीं किया तथा न ही अब तक वैक्सीन लगवाई थी|

अपने इस लेख को हमने संक्रमण की अवस्था अनुसार तीन भागों में बांटा है – निम्न, मध्यम तथा जटिल| 

निम्न अवस्था वो है जब संक्रमण आपके शरीर में प्रवेश करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है| इस स्थिति में आपको हल्के लक्षण शरीर में दिखने लगते हैं जैसे गले में खराश, बेचैनी, बुखार, खांसी, चक्कर आना, कमजोरी, शरीर में हल्का दर्द होना आदि| इस अवस्था में ये लक्षण बहुत हल्के होते हैं तथा शरीर को अधिक परेशान नहीं करते| किन्तु यही वो अवस्था होती जहां की गई लापरवाही घातक भी सिद्ध हो सकती है| रोगी को चाहिए कि इसी अवस्था से बिना विलंब के अपना उपचार प्रारंभ कर दे| उपचार की विधि नीचे बताई है|

मध्यम अवस्था में उपरोक्त लिखित लक्षण थोड़े गहन हो जाते हैं| ऐसे में गले में दर्द रहना, तेज बुखार, नजला जुकाम, शरीर में तीव्र पीड़ा और जोर से बलगम या सूखी खांसी होने लगती है| इस अवस्था में लापरवाही का कोई अवसर नहीं होना चाहिए| आप प्रारम्भिक उपचार को नियमित रूप से करते रहें|

जटिल अवस्था में संक्रमण का प्रभाव फेफड़ों तक पहुँच जाता है| इस परिस्थिति में श्वास लेने में कठिनता, छाती में दर्द के साथ खांसी, सूखी खांसी के साथ उपरोक्त अन्य लक्षण भी हो सकते हैं| इस अवस्था में फेफड़ों में एक गाढ़ा कफ जमा हो जाता है जिससे श्वास लेने में बहुत कठिनाई होती है| शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरने लगता है| आपातकाल की स्थिति में अस्पताल जाना पड़ सकता है|

पथ्य (खाने योग्य वस्तुएं) - गर्म जल, अनार, सहजन, ऋतु के अनुसार सभी फल सब्जी, नींबू, काली मिर्च, दालचीनी, मुनक्का, अजवायन, ज्वार आदि मोटे अनाज, भुना हुआ चना, बेसन, गोमूत्र, देशी गाय का घी, आदि|

अपथ्य (न खाने योग्य वस्तुएं) - सादा या ठंडा जल, refined तेल, डालडा घी, पथ्य के अतिरिक्त अन्य खट्टे पदार्थ, दूध, भैंस का घी, दही, छाछ, मांस, शराब, गुटखा, धूम्रपान, आदि|



अवस्था अनुसार सरल आयुर्वेदिक चिकित्सा



अवस्था : निम्न




मुख्य औषधियाँ
गिलोयादि गोमूत्र अर्क, गिलोय गोमूत्र घनवटी, तुलसी गोमूत्र अर्क, हल्दी घनवटी, अणु तेल, सुरभि नासिका, गोमयादि तेल, नैसोरीन, गेहूं ज्वार गिलोय स्वरस, अमृत धारा, तुलसी अथवा सादा शहद|
सहायक (optional) औषधियाँ
Eucalyptus का तेल, श्री श्री तुलसी अर्क, आरोग्य पेय, हर्बल चाय, घृतकुमारी रस, च्यवनप्राश, Feverex अर्क, आरोग्य पथ cough syrup आदि|
मुख्य उपचार
नियमित रूप से दिन में कम से कम दो बार भाप का सेवन तथा गरारे, एक अलग कमरे में isolation|
वैकल्पिक उपचार
हवन अथवा कंडे पर घी तथा कपूर की धूनी देना| अनुलोम विलोम तथा अन्य सहायक श्वसन क्रियाएं, बाह्य प्राणायाम, आदि|
औषधि एवं उपचार सेवन विधि
1 चम्मच गिलोयादि अर्क, 1 चम्मच तुलसी गोमूत्र अर्क, 1 हल्दी घनवटी, 1 गिलोय गोमूत्र घनवटी तथा आधी चम्मच तुलसी युक्त शहद अथवा सादा शहद आधा कप हल्के गुनगुने जल में भोजन से आधा घंटा बाद दिन में दो बार लीजिए| ऐसा नियमित रूप से सेवन करने पर बुखार के अधिक बढ़ने की संभावनाएं कम होंगी| बुखार 100 F से कम रहना चाहिए| फिर भी यदि बुखार हो तो इसी दवा में एक से दो चम्मच Feverex की भी मिला लें|

जो लोग गोमूत्र नहीं पीना चाहते वे 30 ml गेहूं ज्वार तथा गिलोय के रस को 30 ml घृतकुमारी स्वरस (aloevera juice) तथा आधा कप गुनगुने जल के साथ दिन में तीन बार लें भोजन से आधा घंटा पहले| यह गोमूत्र वाले फॉर्मूले से कुछ कम कारगर है इसीलिए दिन में तीन खुराक रखनी चाहिए|

आधा चम्मच त्रिकटु चूर्ण तथा आधा चम्मच तुलसी या सादा शहद मिलाकर चटनी बना लें तथा भोजन के 1 घंटे बाद इसे चाट लें| ऐसा दिन में दो बार करें| इसमें आप तुलसी और अदरक का रस भी मिला सकते हैं| खांसी न हो तो न खाएं|

जल में 3 चुटकी सेंधा नमक, 1 चुटकी हल्दी, 3 बूंद अमृतधारा सहित पहले भाप लें| इसी फॉर्मूले के साथ बाद में गरारे करें| तत्पश्चात नाक में 3-3 बूंदें नैसोरिन, सुरभि नासिका, अणु तेल अथवा गोमयादि तेल में से किसी एक की डालें| यह पूरी प्रक्रिया दिन में कम से कम दो बार करें|

अमृतधारा के स्थान पर Eucalyptus के तेल का प्रयोग किया जा सकता है |

जो भी श्वसन क्रिया हो उसे आराम से किन्तु गहरा करें| तेज गति से न करें| तेज गति से करने पर रक्तचाप प्रबल (blood प्रेशर high) हो जाता है|

खांसी होने पर आप आरोग्य पथ की cough सिरप भी ले सकते हैं| खांसी को देखते हुए 1 से 2 चम्मच दिन में 2 से 3 बार भोजन के बाद लीजिए|



अवस्था : मध्यम


मुख्य औषधियाँ
गिलोयादि गोमूत्र अर्क, गिलोय गोमूत्र घनवटी, Feverex अर्क, हल्दी घनवटी, शृंगयादि चूर्ण, अणु तेल, सुरभि नासिका, गोमयादि तेल, नैसोरीन, गेहूं ज्वार गिलोय स्वरस, अमृत धारा, तुलसी; Multi floral या सादा शहद|
सहायक (optional) औषधियाँ
Eucalyptus का तेल, श्री श्री तुलसी अर्क, आरोग्य पेय, हर्बल चाय, घृतकुमारी रस, च्यवनप्राश, सितोपलादि चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण आदि|
मुख्य उपचार
नियमित रूप से दिन में कम से कम दो बार भाप का सेवन तथा गरारे, एक अलग कमरे में isolation|
वैकल्पिक उपचार
हवन अथवा कंडे पर घी तथा कपूर की धूनी देना| अनुलोम विलोम तथा अन्य सहायक श्वसन क्रियाएं, बाह्य प्राणायाम, आदि|
औषधि एवं उपचार सेवन विधि
1 चम्मच गिलोयादि अर्क, 1 चम्मच तुलसी गोमूत्र अर्क, 1 चम्मच Feverex, 2 हल्दी घनवटी, 2 गिलोय गोमूत्र घनवटी तथा आधी चम्मच तुलसी युक्त शहद अथवा सादा शहद आधा कप गुनगुने जल में भोजन से आधा घंटा बाद दिन में तीन बार लीजिए| ऐसा नियमित रूप से सेवन करने पर बुखार के अधिक बढ़ने की संभावनाएं कम होंगी| बुखार 100 f से कम रहना चाहिए|

जो लोग गोमूत्र नहीं पीना चाहते वे 30 ml  गेहूं ज्वार तथा गिलोय के रस को 30 ml घृतकुमारी स्वरस (aloevera juice) तथा आधा कप गुनगुने जल के साथ दिन में चार बार लें भोजन से आधा घंटा पहले| यह गोमूत्र वाले फॉर्मूले से कुछ कम कारगर है इसीलिए दिन में इस स्थिति में चार खुराक रखनी चाहिए|

आधा चम्मच शृंगयादि चूर्ण तथा आधा चम्मच तुलसी, multifloral या सादा शहद मिलाकर चटनी बना लें तथा भोजन के 1 घंटे बाद इसे चाट लें| ऐसा दिन में तीन बार करें| इसमें आप तुलसी और अदरक का रस भी मिला सकते हैं| खांसी न हो तो न खाएं यह औषधि|

जल में 3 चुटकी सेंधा नमक, 1 चुटकी हल्दी, 3 बूंद अमृतधारा सहित पहले भाप लें| इसी फॉर्मूले के साथ बाद में गरारे करें| तत्पश्चात नाक में 3-3 बूंदें नैसोरिन, सुरभि नासिका, अणु तेल अथवा गोमयादि तेल में से किसी एक की डालें| यह पूरी प्रक्रिया दिन में कम से कम दो बार करें|

अमृतधारा के स्थान पर Eucalyptus के तेल का प्रयोग किया जा सकता है| अमृतधारा में अजवायन होने से यह अधिक कारगर है| अजवायन anti viral होती है|

जो भी श्वसन क्रिया हो उसे आराम से किन्तु गहरा करें| तेज गति से न करें| तेज गति से करने पर रक्तचाप प्रबल (blood प्रेशर high) हो जाता है|



अवस्था : जटिल



मुख्य औषधियाँ
गिलोयादि गोमूत्र अर्क, गिलोय गोमूत्र घनवटी, Breathon अर्क, Breathon घनवटी, च्यवनप्राश, अणु तेल, सुरभि नासिका, गोमयादि तेल, नैसोरीन, शृंगयादि चूर्ण, अमृत धारा, तुलसी, Acacia या सादा शहद, दालचीनी का चूर्ण|
सहायक (optional) औषधियाँ
Eucalyptus का तेल, श्री श्री तुलसी अर्क, आरोग्य पेय, हर्बल चाय, घृतकुमारी रस, सितोपलादि चूर्ण, त्रिकटु चूर्ण आदि|
मुख्य उपचार
मुख्य औषधियों का सेवन, Oxygen स्तर की नियमित जांच, खुली हवा का सेवन, एक अलग कमरे में isolation, हवन अथवा कंडे पर घी तथा कपूर की धूनी देना| अनुलोम विलोम तथा अन्य सहायक श्वसन क्रियाएं, बाह्य प्राणायाम, आदि |
वैकल्पिक उपचार
आपातकालीन स्थिति में तुरंत अस्पताल से संपर्क करना |
औषधि एवं उपचार सेवन विधि
1 चम्मच गिलोयादि अर्क, 1 चम्मच तुलसी गोमूत्र अर्क, 2 चम्मच Breathon अर्क, 2 Breathon घनवटी, 1 गिलोय गोमूत्र घनवटी तथा आधी चम्मच तुलसी युक्त शहद, Acacia शहद अथवा सादा शहद आधा कप गुनगुने जल में भोजन से कम से कम आधा घंटा बाद दिन में चार बार लीजिए| ऐसा नियमित रूप से सेवन करने पर छाती में कफ बढ़ने की संभावनाएं कम होंगी| Oxygen का स्तर सुधरने में सहायता मिलेगी| श्वास ठीक प्रकार से लेने में सहायता मिलेगी| तेज खांसी के साथ छाती में जमा कफ बाहर निकल सकता है| अतः घबराएं नहीं|

इस अवस्था में उपरोक्त गोमूत्र की औषधि का कोई विकल्प नहीं है|

एक चौथाई चम्मच शृंगयादि चूर्ण, आधा चम्मच त्रिकटु, आधा चम्मच दालचीनी का चूर्ण तथा एक चम्मच तुलसी, Acacia या सादा शहद मिलाकर चटनी बना लें तथा भोजन के 1 घंटे बाद इसका सेवन करें, यदि जीभ बाहर निकाल कर चाटना उचित लगे तो वह अवश्य करें | ऐसा दिन में तीन बार करें|

जल में 3 चुटकी सेंधा नमक, 1 चुटकी हल्दी, 3 बूंद अमृतधारा सहित पहले भाप लें| इसी फॉर्मूले के साथ बाद में गरारे करें| तत्पश्चात नाक में 3-3 बूंदें नैसोरिन, सुरभि नासिका, अणु तेल अथवा गोमयादि तेल में से किसी एक औषधि का प्रयोग करे | यह पूरी प्रक्रिया दिन में कम से कम तीन बार करें|

इस अवस्था में अमृतधारा का कोई विकल्प नहीं है| अमृतधारा में अजवायन होने से यह अधिक कारगर है| अजवायन anti-viral होती है|

जो भी श्वसन क्रिया हो उसे आराम से किन्तु गहरा करें| तेज गति से न करें| तेज गति से करने पर रक्तचाप प्रबल (blood प्रेशर high) हो जाता है|

Oxygen का स्तर, Pulse Oximeter की सहायता से निरंतर मापते रहें| Oxygen का स्तर 94 या कम रहने पर आपको steroid की आवश्यकता पड़ सकती है जिसके लिए आपको अस्पताल से तुरंत संपर्क करना चाहिए |



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इति ॐ शम ||