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क्या आप घटाघट पानी पीते हैं? सावधान हो जाएँ!

क्या आप घटाघट पानी पीते हैं? सावधान हो जाएँ!

पानी कभी भी घटाघट नहीं पीना चाहिए| हमारे मुँह में जो लार है उसमें गज़ब के औषधीय गुण होते हैं| एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए आपके रक्त में अम्ल (acidity) नहीं होना चाहिए| यही एसिडिटी कई गंभीर रोगों को जन्म देती है| रक्त में एसिडिटी आती है आंतों और गुर्दे से| गुर्दे में एसिड पहुँचता है अमाशय से| इसीलिए सबसे जरूरी है कि अमाशय में न अधिक अम्ल होना चाहिए और न ही अधिक क्षार (base)| संसार में केवल पानी ही है जो न तो अम्ल है और न ही क्षार (ph value 7) लेकिन यह पानी जिसमें जाकर मिलता है, उसी के गुण भी धारण कर लेता है| यदि यह पेट के अम्ल से मिलेगा तो खुद भी अम्ल बन जाएगा| इसीलिए अम्ल को कम करने के लिए क्षार चाहिए और क्षार पेट के सबसे निकट, मुँह में होता है| यह आपके मुँह में लार के रूप में पाया जाता है| यही लार आपके पेट की अम्लता को नियंत्रित रखेगा| वाग्भट्ट जी का यह अकेला सूत्र इतना प्रभावशाली है कि यदि आप अपने पेट की अम्लता को नियंत्रित रख सके तो अकेला यही सूत्र आपको शतायु (सौ साल जीने वाला) बना सकता है! इसीलिए पानी को हमेशा चुस्कियों के साथ पीएं जैसे आप गर्म चाय या दूध पीते हैं| उसे मुँह में तथा जीभ के नीचे एक दो बार घुमाकर पीएं| इसे नियम बना लें| चाहे कितनी भी प्यास लगी हो, आप इस नियम को न छोड़ें! कुछ समय बाद आपकी यह आदत बन जाएगी और आप इसके अलावा दूसरे किसी तरीके से पानी पीना पसंद भी नहीं करेंगे|